राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ (Rajasthan ki Sinchae Pariyojana)

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 राजस्थान की सिंचाई परियोजनाएँ

(Rajasthan irrigation projects)

✔️ क्षेत्रफल के अनुसार राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है ।
✔️ राजस्थान के लगभग दो तिहाई क्षेत्रफल पर मरूस्थल का विस्तार पाया जाता है । तथा इस क्षेत्र में औसत वार्षिक वर्षा 40 सेन्टीमीटर तक होती है। ✔️ वर्षा की अपर्याप्तता तथा जलवायु की विषमता के कारण राज्य में सिंचाई तथा पेयजल साधनों का अत्यधिक महत्व है
✔️ राजस्थान में देश के कुल जल संसाधन का लगभग 3 प्रतिशत भाग पाया जाता है ।
✔️ राज्य की प्रमुख सिंचाई परियोजनाएँ निम्नानुसार है :-

भाखड़ा-नांगल सिंचाई परियोजना
(Bhakra-Nangal Irrigation Project)
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✔️ भारत की सतलज नदी पर स्थित यह परियोजना सबसे बड़ी बहुउद्देशीय परियोजना है ।

✔️ यह राजस्थान, पंजाब, हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश प्रान्त की संयुक्त परियोजना है । इस परियोजना में राजस्थान का हिस्सा 15.22 प्रतिशत हैं।

✔️ इस परियोजना का सर्वप्रथम विचार पंजाब के तत्कालीन गर्वनर सर लुईस डेन ने 1908 में दिया तथा इस परियोजना का निर्माण कार्य 1948 के बाद प्रारम्भ हुआ ।

✔️ इस परियोजना के तहत दो बाँधों का निर्माण किया गया है, जिनका विवरण इस प्रकार है-

भाखड़ा बाँध (Bhakra Dam)- यह बाँध हिमाचल प्रदेश के विलासपुर में स्थित है, यह बाँध सतलज नदी पर स्थित है तथा एशिया का सबसे बड़ा व

सबसे ऊँचा कंक्रिट निर्मित गुरूत्व बाँध है

✔️ इस बाँध की आधारशिला 17 नवम्बर 1955 को रखी गई है तथा इस बाँध का निर्माण कार्य 1962 में पुरा हुआ।

✔️ सन् 1963 में इस बाँध को पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने राष्ट्र को समर्पित किया ।

नोट :- इस बाँध का का निर्माण कार्य इन्जनियर हार्वे स्लोकेन की निगरानी में पुरा हुआ ।

नोट :- भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने इस बाँध को “पुनरुत्थित भारत के नवीन मन्दिर" तथा "चमत्कारी विराट वस्तु" की संज्ञा दी है ।

✔️ इसी बाँध पर गोविन्द सागर जलाशय स्थित है । इस बाँध के बायें तथा दायें किनारों पर दो विद्युत गृहों का निर्माण किया गया है ।

नांगल बाँध (Nangal dam)- यह रोपड़ (पंजाब) में स्थित है । इस बाँध का निर्माण 1952 में किया गया । इसकी ऊँचाई 95 फीट तथा लम्बाई 1000 फीट है । इस बाँध से नागल हाईडल चैनल नहर निकाली गई है, जिस पर दो विद्युत गृहों का निर्माण किया गया है । इन विद्युत गृहों से कुल 1493 मेघावाट बिजली उत्पादित होती है इसमें राजस्थान का हिस्सा 227.32 मेघावाट है ।

रावी व्यास सिंचाई परियोजना (Ravi Vyas Irrigation Project)

✔️ रावी तथा व्यास नदी के जल के उपयोग के लिये राजस्थान, पंजाब तथा हरियाणा की संयुक्त परियोजना है, इस परियोजना के तहत व्यास नदी पर दो बाँध बनाये गये है | 1. पड़ोह बाँध 2. पोंग बाँध

पड़ोह बाँध (Paddock Dam)- इसका निर्माण हिमाचल प्रदेश में मण्डी कस्बे के समीप किया गया है । इस बाँध से व्यास-सतलज लिंक चैनल का निर्माण किया गया है, जिसकी सहायता से सतलज नदी में पानी की आपूर्ति कर भाखड़ा नांगल बाँधों में जल का स्तर बना रहता है ।

पोंग बाँध- इस बाँध का निर्माण हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा कस्बे में किया गया है ।

नोट :- इन्दिरा गाँधी नहर को आवश्यकता के समय इस बाँध से जलापूर्ति की जाती है ।

✔️ इस परियोजना पर दो विद्युत गृह स्थापित किये गये है ।

✔️ पोंग विद्युत गृह से 390 मेघावाट विद्युत उत्पादित होती है, जिसमें राजस्थान का हिस्सा 59 प्रतिशत है ।

✔️ देहर विद्युत गृह :- इसका निर्माण सतलज लिंक नहर पर किया गया है । विद्युत उत्पादन क्षमता 990 मेघावाट है । जिसमें राजस्थान का हिस्सा 20 प्रतिशत है ।

✔️ इराड़ी आयोग :- रावी-व्यास जल समझौते के प्रथम प्रयास 1955 से 1981 के मध्य किये गये ।

✔️ 1985 में इस पर पुनः विवाद उत्पन्न हो गया । इसके बाद 1986 में राजीव लोगो वॉल समझौते के तहत 26 जनवरी 1986 को इराड़ी आयोग का गठन किया गया । इस आयोग में मई 1987 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, इसने रावी-व्यास के अतिरिक्त जल में राजस्थान का हिस्सा 86 लाख एकड़ फीट निर्धारित किया ।

नोट :- भारत, पाकिस्तान के मध्य विश्व बैंक की मध्यस्थता से 19 सितम्बर 1960 को सिन्धु जल सन्धि हस्ताक्षरित हुई, जिसमें भारत को राव, व्यास व सतलज नदीयों का पूरा पानी उपयोग करने का अधिकार मिला।

माही बजाज सागर परियोजना (Mahi Bajaj Sagar Project)

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✔️ यह परियोजना राजस्थान तथा गुजरात की संयुक्त परियोजना है । इस हेतु राजस्थान व गुजरात के मध्य 1966 में समझौता हुआ, तथा योजना आयोग की स्वीकृति के उपरान्त 1971 में इस योजना का निर्माण कार्य प्रारम्भ हुआ ।

✔️ इस योजना का निर्माण कार्य तीन चरणों में हुआ

प्रथम चरण- प्रथम चरण के तहत बाँसवाड़ा जिले के बोरखेड़ा नामक स्थान पर माही बजाज सागर बाँध का निर्माण किया गया

✔️ इस बाँध की कुल लम्बाई 3109 मीटर है । इस चरण में राजस्थान का हिस्सा 45 प्रतिशत तथा गुजरात का हिस्सा 55 प्रतिशत था ।

नोट :- इस बाँध का निर्माण 1983 में पुरा हुआ तथा इस बाँध को 1 अप्रेल 1983 को राष्ट्र को समर्पित किया गया। इस बाँध का नामकरण जमना लाल बजाज के नाम पर किया था ।

दुसरा चरण- इस परियोजना के दुसरे चरण में नहरी तन्त्र के विकास हेतु बाँसवाड़ा के माही-बजाज सागर के समीप कागदी पिकअप बाँध (Kagdi pickup bind) का निर्माण किया गया । इस बाँध से सिंचाई हेतु दो नहरें दायी तथा बायी ओर निकाली गई है। दायी ओर गनोड़ा नहर तथा बायी ओर घाटोल नहर पर दो विद्युत गृह स्थापित किये गये है |

तीसरा चरण- इस चरण के तहत मुख्य बाँध पर 80 मेघवाट तथा 90 मेघावाट के दो विद्युतगृह 1986 तथा 1989 में स्थापित किये गये है।

नोट :- इस परियोजना का सर्वाधिक लाभ बाँसवाड़ा जिले को मिल रहा है ।

नोट :- इस परियोजना के तहत गुजरात के पंचमहल जिले में कड़ाना बाँध (kadana dam)का निर्माण किया गया है । इस बाँध की सम्पूर्ण लागत गुजरात सरकार द्वारा वहन की गई है । अतः वही इसका लाभांशी है, किन्तु जैसे ही नर्मदा परियोजना पूरी हई इस बांध का पानी राजस्थान को भी मिलेगा ।

✔️ इस परियोजना के कुल विद्यत उत्पादन क्षमता 140 मेघावाट है । यह सम्पर्ण विद्यत राजस्थान को प्राप्त होती है ।

✔️ कडाना बाँध के निर्माण का समस्त खर्च गुजरात सरकार द्वारा वहन किया गया है, जबकि इसका समस्त लाभ राजस्थान को प्राप्त हो रहा है ।

चम्बल परियोजना (Chambal Project)
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✔️ चम्बल परियोजना मध्यप्रदेश और राजस्थान की एक संयुक्त परियोजना है । इस परियोजना से दोनों राज्यों को बराबर हिस्सा (50-50 प्रतिशत) प्राप्त होता है ।

✔️ चम्बल परियोजना के तीन चरणों में चार बाँधों का निर्माण किया गया है।

प्रथम चरण-

1.गाँधी सागर बाँध(Gandhi Sagar Dam)-(मन्दसौर, मध्यप्रदेश)-जिसका निर्माण कार्य 1959 में पुरा हुआ - विद्युत क्षमता - 115 मेघावाट।
2.कोटा बैराज बाँध(Kota Barrage Dam)-(कोटा, राजस्थान)-एकमात्र बाँध जिसे विद्युत उत्पादन नही होता है निर्माण 1960 में।

द्वितीय चरण

3.राणा प्रताप सागर बाँध(Rana Pratap Sagar Dam)- (रावतभाटा,चित्तौड़गढ़) - फरवरी 1970 में देश को समर्पित किया गया - विद्युत क्षमता-172 मेघावाट |

तृतीय चरण

4.जवाहर सागर बाँध(Jawahar Sagar Dam)- (बोरावास, कोटा) -विद्युत क्षमता - 99 मेघावाट -1972 में निर्मित यह एक पिकअप बाँध है।

नोट :- कोटा बेराज बाँध से दो मुख्य नहर निकाली गई है । बायी ओर से कोटा-बून्दी को सिंचाई सुविधा जबकि दायी नहर से कोटा, बारां को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है ।

✔️ चम्बल की दायी नहर पर आठ नहर परियोजना का निर्माण किया गया है । जिसकी सहायता से कोटा तथा बारां जिले के 15633 हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध होती है । बारां जिले के मानगढ़ गाँव के पास बिलास नदी पर निर्मित बाँध राज्य का दुसरा बड़ा मिट्टी का बाँध है ।

गंग नहर सिंचाई परियोजना (Ganga Canal Irrigation Project)

✔️ गंगनहर का निर्माण 1927 में तत्कालीन बीकानेर महाराजा गंगासिंह द्वारा किया गया ।

✔️ गंगनहर सतलज नदी से फिरोजपुर के निकट हुसैनीवाला से निकाली गई है यह खख्खा के पास गंगानगर जिले में राजस्थान में प्रवेश करती है । इसकी कुल लम्बाई 292 किलोमीटर है ।

✔️ लक्ष्मीनारायणजी, लालगढ़, करणीजी, समिया गंगनहर इसकी प्रमुख शाखाएँ है ।

✔️ नहर के आधुनिकीकरण के लिये 445.79 करोड़ रूपये की परियोजना 31 मई 2000 को केन्द्रीय जल आयोग द्वारा स्वीकृत की गई थी ।

✔️ गंगनहर लिंक चैनल का निर्माण 1980 में किया गया । इसका उद्गम स्थल हरियाणा में लौहगढ़ नामक स्थान पर है।

✔️ गंगनहर में पानी बीकानेर नहर के अन्त में बने शिवपर हैड की मदद से पहँचता है । बीकानेर नहर के ऑफटेक बिन्दु से 2720 क्यूसेक पानी गंगनहर को मिलता है । इस परियोजना से श्रीगंगानगर जिले के बारह सौ से अधिक ग्राम व चक सिंचाई सुविधा का लाभ उठा रहे है ।

रजाड़ परियोजना (Rajad project)

✔️ नहरी क्षेत्रों में पानी के रिसाव तथा जमाव से अन उपजाऊ हो रही भूमि को पुन: उपजाऊ बनाने हेतु कनाड़ा अन्तर्राष्ट्रीय विकास एजेन्सी व केन्द्र सरकार एवं राजस्थान की आर्थिक सहायता से जून 1991 में रजाड़ परियोजना प्रारम्भ की गई । इस परियोजना के तहत भूमि से 2 फीट नीचे छिद्र युक्त पाईप बिछाये गये है ।

नर्मदा नहर परियोजना (Narmada Canal Project)

✔️ यह परियोजना राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात तथा महाराष्ट्र राज्य की संयुक्त परियोजना है ।

✔️ इससे नर्मदा जल प्राधिकरण द्वारा राजस्थान का हिस्सा 0.5 निर्धारित किया गया है ।

✔️ इस जल के उपयोग के लिये गुजरात के सरदार सरोवर बाँध से नर्मदा नहर का निर्माण किया जा रहा है। इस नहर की लम्बाई 532 किलोमीटर है जिसमे गुजरात में इसकी लम्बाई 458 किलोमीटर व राजस्थान में इस नहर की लम्बाई मात्र 74 किलोमीटर है ।

✔️ यह नहर राजस्थान के जालौर जिले के सीलू गाँव में प्रवेश करती है जो 27 मार्च 2008 को निर्माण कार्य पुरा हुआ ।

✔️ राजस्थान में इसकी वितरिकाओं की कुल लम्बाई 1403 किलोमीटर प्रस्तावित की गई है । इस परियोजना के तहत राज्य के बाड़मेर तथा जालौर जिले के 2.46 लाख हैक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो रही है तथा 1336 गाँवों को पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है ।

✔️ यह राजस्थान की प्रथम परियोजना है जिससे पूर्ण सिंचाई बून्द-बून्द अथवा फव्वारा पद्वति से किये जाने का प्रावधान है।

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