Sikar (सीकर) District Jila Darshan

सीकर

उपनाम - राजस्थान की हाईटेक सिटी
ताम्रयुगीन सभ्यता की जननी – गणेश्वर सभ्यता
चुरू, झुझुनूं व सीकर का क्षेत्र – शेखावटी
Sikar District Area-7,732 km²
Sikar tahsil map-
sikar tehsil list-total tahsil-6
Sikar (सीकर)  District Jila Darshan
sikar-district-map

👉 परिचय-
शेखावटी शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग डब्ल्यु.एन. नार्डन ने किया।
1834 में हैनरी फोस्टर ने शेखावटी बिग्रेड नाम से फौज का गठन किया।
शेखावटी के प्रमुख नृत्य गींदड़, चंग, ढप, कच्छी घोड़ी, लहुर/लुहर व जिंदाद है।
कांतली नदी का बहाव क्षेत्र तोरावाटी कहलाता है।
इस क्षेत्र में तोरावाटी बोली बोली जाती है।

Sikar District village- 201

सीकर की स्थापना 1687 में राव दौलत सिंह ने की थी।
सीकर शहर के संस्थापक राव शिव सिंह है।
दूजोद गांव के राव जसवंत सिंह के पुत्र दौलत सिंह ने वीरभान का बास नामक गांव मे विक्रम सम्वत 1794 में गढ तथा मोहनी का मंदिर बनवाया व सीकर नगर की नींव रखी।
शेखावटी क्षेत्र में सीकर का गींदड़ नृत्य प्रसिद्ध है।
सीकर की शाकम्भरी देवी लोक प्रसिद्ध है।

sikar district pin code -332001

👉 स्थान विशेष-
फतेहपुर – राजस्थान का प्रथम कृषि विज्ञान केन्द्र यहां पर है। श्री सरस्वती पुस्तकालय भी यहां पर है।
पटोदा - यहां का लुंगड़ा प्रसिद्ध है।
हर्ष पर्वत- यहां पर 10वीं सदी का प्राचीन शिवालय है। इसके अलावा यहां पर पवन उर्जा संयंत्र भी है।
जीण माता – लौक कथाओ मे जयन्ती देवी शक्ति पीठ के रूप मे मानी जाने वाली जीण माता का स्थान सीकर मे एक दसवीं सदी के भव्य मंदिर के रूप में है।
रैवासा - यहां पर जीण माता का मंदिर है व सप्त गौमाता मंदिर है।
कोछोर – यहां खारे पानी की झील है।
खाचरियावास – भैरोसिंह शेखावत का जन्म स्थान होने के कारण चर्चित।
खाटु श्याम जी – श्री श्याम बाबा जी व कृष्ण जी का मंदिर है। यहां फाल्गुन व कार्तिक मास में मेले का आयोजन होता है।
दिवराला – 1987 में हुए रूप कंवर सती कांड के कारण चर्चित स्थल

श्रीमाधोपुर – पंसारी की हवेली यहां का प्रसिद्ध स्थल है।

खण्डेला – गोटा उद्योग के लिए प्रसिद्ध स्थल
गणेश्वर – यह ताम्रयुगीन सभ्यता की जननी कहलाती है। यह कांतली नदी पर बसी सभ्यता है।

रघुनाथगढ - उतरी अरावली की सबसे उंची चोटी 1055 मी. है।

बानीवाला की ढाणी – यहां से तांबा अयस्क के भण्डार मिले है।

काशी का बास - यह बजाज उद्योग समुह के संस्थापक जमनालाल बजाज का जन्म स्थान है।

संत बुद्धगिरी की मढ़ी – फतहपुर कस्बे के निकट टीले पर बने इस मंदिर पर प्रतिवर्ष शिवरात्रि को विशाल मेले का आयोजन होता है।

रीगंस- भवानी जी का पुराना मंदिरगोपीनाथ जी का मंदिर दर्शनीय स्थल । यहां पर भैरोजी का विशाल मेला भरता है।

बराल गांव – यहां पर खुदाई में ऐतिहासिक महत्व के सिक्के मिले है।

गुरारा – यहां चांदी के बने 2744 पंचमार्क सिक्के मिले है।

जवाहर जी व डुंगर जी - अंग्रेजो से लोहा लेने वाले वीर स्वतन्त्रता सेनानी।

👉 नदियां-

कांतली नदी – सीकर की खण्डेला पहाड़ी से उद्गम व झुंझुंनू के मंडेला में लुप्त होने वाली इस नदी को कांटली या मौसमी नदी भी कहते है। नीम का थाना सीकर में इसके किनारे गणेश्वर सभ्यता स्थित है। इसकी लम्बाई 100 कि.मी. है। यह झुंझुंनू को दो भागो में बांटती है।

प्रमुख झीलें - रैवासा, कोछोर एवं प्रीतममपुरी झील (खारे पानी की झीलें)

मुख्य महोत्सव – शेखावटी महोत्सव जिसका आयोजन फरवरी माह में होता है।

आर.टी.डी.सी. होटल – हवेली, फतेहपुर

प्राचीन सभ्यता - गुरारा व गणेश्वर

मुख्य हवेलियां – बिनाणीयों की हवेली व राठी हवेली

मुख्य दुर्ग – देवगढ, लक्ष्मणगढ व फतेहपुर दुर्ग

👉 कृषि विशेष-

सर्वाधिक क्षेत्रफल वाली फसल - चवंला

सर्वाधिक उत्पादन वाली फसल - चवंला, प्याज, अनार व मैथी

यहां पर प्रथम कृषि विज्ञान केन्द्र फतेहपुर में 1974 में स्थापित किया गया।

मुख्य खनिज कैल्साइट, चीनी मृतिका/चाइना क्ले

👉 उर्जा क्षेत्र -

हर्ष पर्वत पवन उर्जा संयंत्र -यहां सलादीपुरा मे पाईराइट्स पाया जाता है। जिसका प्रयोग गंधक, अम्ल, तेजाब व उर्ववरक में किया जाता है। इसे झुठा सोना भी कहते है।

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