राजस्थान का भौतिक विभाजन (Physical division of rajasthan)

राजस्थान का भौतिक विभाजन
https://www.haabujigk.in/
राजस्थान-का-भौतिक-विभाजन

1. मरू- मरूस्थल

2. मेरू -पर्वतीय प्रदेश अरावली

3. माल - दक्षिण पूर्वी पठारी भाग हाडौती का पठार

प्राक् ऐतिहासिक काल में विश्व को 3 भूखण्डों का अवशेष माना जाता है ।

1. अंगारालैण्ड 2. गोड़वानालैण्ड 3. टेथिस सागर

https://www.haabujigk.in/
प्राक्-ऐतिहासिक-काल-bhukhand

"वेगनर" के अनुसार विश्व का भूखण्ड पिण्ड के आकार के समान था जिसे पेन्जिया कहा गया । इसके चारों ओर पैथलासा सागर स्थित था । यह सिद्धान्त 1912 में वेगनर ने दिया । इसे महाद्वीपीय प्रवाह का सिद्धान्त भी कहते है।

सर्वप्रथम वी.सी. मिश्रा ने 1966 में अपनी पुस्तक "भारत का भूगोल' में राजस्थान को भौतिक भागों में बांटने का प्रयास किया गया इन्होने राजस्थान को 7 भौतिक विभागों में विभाजित किया है।

नोट :- V.C. मिश्रा की इस पुस्तक का प्रकाशन 1968 में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा किया गया ।

राजस्थान को सर्वप्रथम जलवायु के आधार पर भौतिक विभागों में बांटने का प्रयास 1968 में A.K. सेन द्वारा किया गया । इस प्रकार A.K. सेन दूसरा व्यक्ति था जिसने राजस्थान को भोतिक भागों में बांटने का प्रयास किया गया।

रामलोचन सोलंकी राजस्थान को भोतिक भागों में विभाजन करने वाले तीसरे व्यक्ति थे उन्होने 1971 में राजस्थान का भौतिक विभाजन किया ।

राजस्थान जो कि भारत के उत्तर-पश्चिम भाग में पतंगाकार आकृति लिये हुए है । अर्थात राजस्थान का आकार टोंक जिले के आकार के समान है ।

राजस्थान जिसका वर्तमान क्षेत्रफल 342239 वर्ग किलोमीटर है, जो कि भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.41% है।

राजस्थान को टेथिस सागर व गौडवाना लैण्ड का अवशेष माना जाता है

राज्य के सर्वाधिक भाग पर मरू तथा न्यूनतम भाग पर माल का विस्तार है |

राज्य के अध्ययन की दृष्टि से राजस्थान को चार भौतिक प्रदेशों में विभाजित किया है--

1. पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश
2. मध्यवर्ती अरावली प्रदेश
3. पूर्वी मैदानी भाग
4. हाडौती का पठार (दक्षिणी पूर्वी प्रदेश)
https://www.haabujigk.in/
राजस्थान-के-भौतिक-विभाग
राज्य का पूर्वी मैदानी भाग तथा पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश टेथिस सागर के अवशेष है जो कि अंगारा लैण्ड तथा गौड़वाना लैण्ड के मध्य फैला हुआ है।
राज्य का हाडौती का पठार तथा मध्यवर्ती अरावली प्रदेश गौडवाना लेण्ड के अवशेष है।
प्राक् ऐतिहासिक काल के अनुसार राजस्थान का भौतिक विभाजन-
1. अंगारालैण्ड- राज्य में कोई भी अवशेष नही है ।
2. गोड़वाना लैण्ड- मध्यवर्ती पर्वतीय प्रदेश अरावली, हाड़ोती का पठार।
3. टैथिस सागर- पूर्वी मैदानी भाग पश्चिमी मरूस्थलीय प्रदेश।

पश्चिम मरूस्थलीय प्रदेश-
https://www.haabujigk.in/
पश्चिम-मरूस्थलीय-प्रदेश-Rajasthan

राज्य का पश्चिम मरूस्थलीय प्रदेश टेथिस सागर का अवशेष है ।

अरावली पर्वत माला के पश्चिम में थार के मरूस्थल का विस्तार है |

यह मरूस्थलीय प्रदेश विश्व का सबसे घना बसा मरूस्थल तथा सबसे नवीनतम मरूस्थल है ।

थार का मरूस्थल विश्व का सर्वाधिक जैव विविधता वाला मरूस्थल है |

इस क्षेत्र के लिये "रूक्ष" शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग डॉ ईश्वरीय प्रसाद द्वारा किया गया । इस क्षेत्र को थली प्रदेश तथा "बालू वाला मैदानी भाग" के नाम से भी जाना जाता है ।

इस क्षेत्र में बलुई मिट्टी का विस्तार पाया जाता है ।

नोट :- पाकिस्तान में थार के मरूस्थल को "चेलिस्तान" नाम से जाना जाता है ।

थार का मरूस्थल राजस्थान के 12 जिलों में 1,75,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है ।

अरावली के पश्चिम में राज्य के 13 जिले स्थित है । जिनमें 12 जिलों में मरूस्थलीय है ।

नोट :- पहले ग्यारह जिले मरूस्थलीय थे, वर्तमान में हनुमानगढ़ को भी शामिल कर लिया गया है ।

नोट :- पहले राज्य के 58% भाग पर मरूस्थल का विस्तार था, परन्तु वर्तमान में अरावली पर्वतमाला के कटी-फटी होने के कारण मरूस्थल का विस्तार पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ रहा है । अतः वर्तमान में राज्य के 61.11% भाग पर मरूस्थल का विस्तार हो गया है । अर्थात राज्य के लगभग दो-तिहाई भाग पर मरूस्थल का विस्तार है ।

राज्य के 12 मरूस्थलीय जिले इस प्रकार है :-

बीकानेर संभाग :- बीकानेर, चुरू, हनुमानगढ़, गंगानगर ।
जोधपुर संभाग :- जोधपुर, जैसलमेर, जालौर, बाडमेर, पाली, (अपवाद सिरोही)
शेखावाटी क्षेत्र :- सीकर, झुन्झुनूं।
अजमेर संभाग :- नागौर ।
नोट :- राज्य के सिरोही जिले में मरूस्थल का विस्तार नही है अर्थात यह जिला मरूस्थलीय जिलों की श्रेणी में शामिल नही है ।

 उत्तर-पश्चिम मरूस्थलीय प्रदेश एक सामान्य परिचय-

मरूस्थल का कुल क्षेत्रफल - 61.11% है
जनसंख्या - 40%
मिट्टी – बलूई (रेतीली)
जलवायु – शुष्क या अत्यधिक विषम
तापमान – गर्मियों में अत्यधिक 49% तथा सर्दियों में न्यूनतम 3°C रहता है ।
वर्षा – 25-50 से.मी.
प्रमुख फसलें – बाजरा, मोठ, ग्वार
प्रमुख उद्यान - राष्ट्रीय मरूद्यान
मुख्य नदी - लूनी
प्रमुख नहर - इन्दिरा गाँधी नहर
मरुस्थल का सामान्य ढ़ाल – उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर
नोट :- मरूस्थल का ऊँचा उठा हुआ उत्तर-पूर्व भाग थली तथा दक्षिण-पश्चिम भाग नीचे का तली कहलाता है ।
बनावट या संरचना के आधार पर मरूस्थल को तीन भागों में बांटा गया है-
इर्ग – रेतीला मरूस्थल
हम्मादा - पथरीला मरूस्थल
रेग - मिश्रित मरूस्थल
राज्य का मरूस्थल उष्ण मरूस्थल की श्रेणी में आता है यहां की बलूई या रेतीली मिट्टी से धोरों का निर्माण होता है, जिन्हे टीले, टीबे तथा बालूका स्तुप कहा जाता है । जैसलमेर की स्थानीय भाषा में धरियन कहा जाता है।
धोरे या टीलों के तीन प्रकार होते है ।
अनुदेय॑ :- हवा के समानान्तर बनने वाले
अनुप्रस्थ :- हवा के लम्बवत (समकोण पर) बनने वाले टीले
बरखान :- अर्द्धचन्द्राकार आकृति वाले धोरे
नोट 1 :- बरखान प्रकार के धोरे सर्वाधिक नुकसानदायी एवं सर्वाधिक अस्थिर होते है ।
नोट 2:- जोधपुर राज्य का एकमात्र ऐसा जिला है जिसमें सभी प्रकार के बालुका स्तूप पाये जाते है।

Google search any notes and fact:-
राजस्थान के भौतिक प्रदेश PDF,राजस्थान के भौतिक प्रदेश के प्रश्न,
राजस्थान का भौतिक स्वरूप महत्वपूर्ण प्रश्न,
राजस्थान की स्थिति विस्तार एवं मुख्य भौतिक विभाग,
राजस्थान के भौतिक प्रदेश का मानचित्र,
राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश,राजस्थान के भौगोलिक क्षेत्र,
राजस्थान का पूर्वी मैदान 

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ