Jaipur (जयपुर) District Jila Darshan

जयपुर

प्राचीन नाम- जयगढ, रामगढ, ढुढाड़ा, जोबनेर, जोवनपुरी आदि।

उपनाम – गुलाबी नगरी, पूर्व का वेनिस, रंगश्री के द्वीप, वैभव का द्वीप, आइसलैण्ड ऑफ गैलोरी, भारत का पैरिस, सिटी ऑफ आइसलैण्ड, सिंधु सभ्यता की तर्ज पर बसा नगर

अन्य स्थानो के उपनाम -

मंकी वेली- गलता

साल्ट सिटी- सांभर

jaipur district tehsil list-total tahsil- 13Jaipur district Area-579 km²
Jaipur District population- 22,98,782
Jaipur (जयपुर) District Jila Darshan
Jaipur-district-map

परिचय

जयपुर की स्थापना सवाई जयसिंह द्वितीय के द्वारा 18 नवंबर 1727 में की गई।

जयसिंह जिस कछवाहा वंश के थे उसकी स्थापना दुल्हराय ने 1137 मे ढूंढाड़ मे की थी।

आमेर ढुंढाड़ की राजधानी थी।

कोकिल देव ने आमेर को 1207 मे कछवाहा वंश की राजधानी बनाया।

2013 में आमेर दुर्ग को विश्व धरोहर सुची मे शामिल किया गया।

Jaipur village list- total village- 72

जयपुर का प्रमुख नृत्य तमाशा है।

जामवारामगढ बांध, अभ्यारण्य व झील बाणगंगा नदी के किनारे पर है।

जयपुर का जोबनेर किला ज्वाला माता की प्राचीन शक्ति पीठ के कारण प्रसिद्ध है।

ज्वाला माता खंगारोतो की कुलदेवी है।

चाकसु में माधोसिंह द्वारा निर्मित शीतला माता मंदिर है जो चेचक की देवी के रूप मे खण्डीत रूप मे पूजी जाती है।

शीतलाष्टमी चैत्र माह की कृष्ण अष्टमी के दिन मनाया जाता है इस दिन रात का बना भोजन खाया जाता है जो बासेड़ा कहलाता है।

नरैना मे दादू सम्प्रदाय की पीठ है।

यहां की बैराठ सभ्यता भी बाणगंगा नदी के किनारे पर है।

यहां पर बौद्ध व मौर्य कालीन सभ्यता के अवशेष मिले है।

यहां पर चौमु नामक स्थान पर चौमुहागढ किला है।

जयपुर के मानपुरा माचेड़ी नामक स्थान पर कॉमन एफल्युऐंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है।

यह स्थान चमड़ा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

आमेर के महलो में शीशमहल प्रसिद्ध है।

सवाई रामसिंह द्वितीय ने जयपुर को गुलाबी रंग मे रंगवाया था।
जयपुर के अचरोल मे गोल्फ कोर्स एकेडमी है। यहीं पर पहला हाइटेक मातृ शिशु केन्द्र प्रस्तावित है।
जयपुर को हैण्डमेड ज्वैलरी का हब माना जाता है।
जयपुर शहर के वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य थे।
राज्य मे सर्वप्रथम मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट भी यही शुरू हुआ था।

यहां विश्व का प्रथम होम्योपेथिक विश्वविद्यालय है। गलीचा निर्माण केन्द्र भी यहीं पर है।

देश का पहला निर्यात संवर्धन पार्क भी यहां सीतापुरा मे है। यही राजस्थान राज्य सहकारी संघ है।

रिड़कोर का मुख्यालय जयपुर मे है।

राज्य मे प्रथम रेल जयपुर राज्य के आगरा फोर्ट से बांदी कुई के बीच 1874 में प्रारंभ हुई।

जयपुर को रेल से जोड़ने का श्रेय माधेराज द्वितीय को है।

उतर-पश्चिमी रेलवे जोन का मुख्यालय जयपुर है।

राज्य का प्रथम सहकारी भुमि विकास बैंक व राजपुताना महिला नागरिक सहकारी बैंक जयपुर में खोला गया।

जयपुर के वनो से सालर नामक औषधी मिलती है जो बिच्छु के काटने पर दवा के रूप मे प्रयोग की जाती है।

राज्य का प्रथम पक्षी चिकित्सालय जौहरी बाजार जयपुर मे है।

विदेशी पशु प्रजनन फार्म बस्सी मे स्थापित है। बस्सी मे कृत्रिम गर्भाधान हेतु हिमीकृत वीर्य बैंक की स्थापना की गई है।

जयपुर मे दीर्घायु वाला दुध संयंत्र ट्रेटापैक है।

7 अक्टुबर 2014 को मानसरोवर में दुध मे मिलावट की जांच हेतु दुग्ध परिक्षण केन्द्र व अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना की गई है।

पशुधन विकास बोर्ड की स्थापना 1998 मे जामड़ोली मे की गई।

2011 मे सर्वाधिक जनसंख्या, सर्वाधिक आबादी वाला शहर, सर्वाधिक महिला व पुरूष जनसंख्या, सर्वाधिक ग्रामीण व शहरी जनसंख्या तथा सबसे ज्यादा जनसंख्या घनत्व 595 जयपुर का है।

भेड़ व उन अनुसंधान केन्द्र जयपुर में है।

कंप्यूटर एडेड कारपेट डिजाइन सेंटर जयपुर में है।

राज्य का पहला हाथीगांव आमेर के कुण्डा ग्राम मे NH-8 पर स्थापित किया गया है। इसके पास ही कालबेलिया स्कुल ऑफ डांस है।

केन्द्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र जयपुर में है।

स्थान विशेष

आमेर - आमेर का किला इतिहास प्रसिद्ध है। यह कच्छवाहा वंश की राजधानी रहा है। शिलादेवी जो जयपुर के शासको की इष्ट देवी है का मंदिर, जगतशिरोमणी मंदिर, पन्ना मीणा की बावड़ी, नाहरगढ़ का किला, जयगढ का किला व गैटोर जहां कच्छवाहा वंश की छतरीया है आदि अन्य प्रसिद्ध स्थल है।

जमवा रामगढ - कच्छवाहा वंश की कुलदेवी जमवायमाता का मंदिर यहां पर है तथा जमवा रामगढ अभ्यारण्य है।

सरगासूली/इसरलाट - सवाई ईश्वरीसिंह ने इस मीनार का निर्माण राजमहल युद्ध में अपने भाई माधोसिंह से विजय प्राप्त करने पर करवाया।

कोटपूतली - देश का सबसे बड़ा दुध पैकिंग स्टेशन यहां पर है।

विराट नगर/बैराठ - बौद्ध मंदिर के अवशेष, बाणगंगा का मेला, अशोक का भाब्रु शिलालेख, चीनी यात्री हेनसांग की यात्रा व बीजक की पहाड़ी के कारण प्रसिद्ध है।

कालाडेरा- राज्य का पहला साइबर कियोस्क यहां पर है।

लूणियावास – यहां पर गधो का मेला लगता है।

भैसलाना – काले संगमरमर के लिए प्रसिद्ध स्थान है।

फुलेरा - एशिया मे मीटर गेज का सबसे बड़ा रेलवे यार्ड यहां पर है।

नरैना/नरायणा - दादू पंथ की मुख्य पीठ होने के कारण यह स्थान प्रसिद्ध है।

बगरू – बगरू प्रिंट के लिए प्रसिद्ध स्थान है।

सिलोरा - पावरलुम टेक्सटाइल पार्क के लिए जाना जाता है।

सांभर झील - वासुदेव चौहान द्वारा निर्मित इस झील पर बिजोलिया शिलालेख मिला था, यहीं पर चौहानो की कुलदेवी शाकम्भरी का मंदिर है।

यहां पर खारे पानी की सबसे बड़ी झील है जो 500 वर्ग कि.मी. क्षेत्र मे फैली है, 1870 में यहां पर साल्ट म्युजियम खोला गया।

केन्द्र के सहयोग से यहां पर हिन्दुस्तान नमक कम्पनी की स्थापना की गई।

सांभर झील एशिया की सबसे बड़ी अन्तरस्थलीय नमक उत्पादक झील है। यही कुछ दुरी पर नालीसर में देवयानी तीर्थ है।

सांगानेर – हस्त निर्मित कागज व सांगानेरी प्रिंट के लिए प्रसिद्ध । यहां पर हवाई अड्डा भी है।

बस्सी – गौवंश संवर्धन फार्म यहां पर है।

अवरोल - लेजर सिटी काम्पलेक्स के कारण चर्चित स्थल है।

मोरिजा – लोह अयस्क खनिज क्षेत्र

सिटी पैलेस - यहां पर चन्द्रमहल, सुखनिवास महल, प्रीतम निवास, माधव निवास, जयनिवास उद्यान, सवाई मानसिंह संग्रहालय, मुबारक महल, पद्यम प्रभु का मंदिर, नकटी माता का मंदिर, हवा महल व सर्वतोभद्र प्रसिद्ध स्थल है। यहां पर विश्व का सबसे बड़ा चांदी का पात्र रखा हुआ है।

मानपुरा माचेड़ी - लेदर कॉम्पलेक्स व वर्ड ट्रेड सेंटर यहां पर है। 
कूकस यहां पर इलेक्ट्रीक हार्डवेयर टेक्नोलोजी पार्क है। 

गलताजी – रामानंदी सम्प्रदाय की मुख्य पीठ है यही इस स्थान का सम्बंध गालव ऋषि से है।

हवामहल - इसका निर्माण सवाई प्रताप सिंह ने 1799 मे करवाया

जयगढ - सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित इस गढ मे विश्व की सबसे बड़ी तोप जयबाण रखी है।

जन्तर-मन्तर - सवाई जयसिंह द्वारा निर्मित पांच वैद्यशालाओ मे सबसे बड़ी। अन्य वैद्यशालाएं- दिल्ली, उज्जेन, वाराणसी व मथुरा

राणी सती का मंदिर- झुंझुनू मे राणी सती का मंदिर विश्व प्रसिद्ध है उन्ही राणी सती का मंदिर जयपुर मे जयलाल मुंशी के रास्ते में है।

भादवा - दादू तथा निरंजनी सम्प्रदायो की पीठ के लिए प्रसिद्ध स्थल है।

डिग्गी – डिग्गीपुरी के राजा श्री कल्याण जी के मंदिर के लिए प्रसिद्ध स्थल है।

मेड के भिति चित्र - विराट नगर के निकट बाणगंगा नामक स्थान पर इन चित्रो के लिए पाण्डवो का उतर-मध्य कालीन और देवी का आधुनिक मंदिर दर्शनीय है।

पी.के. सेठी- विश्व भर के विकलांगो को कृत्रिम पैर प्रदान करने वाले ‘जयपुर फुट' के आविष्कारक पी. के. सेठी है।

ग्रामीण महिला टेक्नोलोजी पार्क - महिलाओ को स्वरोजगार प्रदान करने के लिए इसकी स्थापना की गई है।

नदी विशेष

मेन्था नदी - जयपुर के मनोहरपुर थाना से उद्गम, सांभर झील में जल गिराती है। इसे स्थानीय भाषा मे मेंढा नाम से जाना जाता है। नागौर मे इसके किनारे लुणवा तीर्थ है।

साबी नदी - सेंवर की पहाड़ी से उद्गम, हरियाणा मे नफजगढ झील मे जल गिराती है। जयपुर का जौधपुरा सभ्यता स्थल भी इसी के किनारे है। जोधपुरा सभ्यता में हाथीदांत के अवशेष मिले है।

बाणगंगा – बैराठ की पहाड़ी से उद्गम, आगरा मे यमुना नदी मे मिल जाती है। बैराठ सभ्यता इसके किनारे पर विकसीत हुई। इस पर जमुआ रामगढ बांध भी है। इसे रूण्डित नदी भी कहते है।

मारेल नदी - चाकसु पंचायत के दूनी नामक स्थान से उद्गम, सवाई माधेपुर मे बहती हुई खण्डार नामक स्थान पर बनास में विलीन हो जाती है।

बांडी नदी – सामोद व आमलोद की पहाड़ीयो से उद्गम, टोंक में बहकर वही बनास नदी मे मिल जाती है।

डूंड नदी - इस नदी के किनारे सांगानेर बसा है।

प्रमुख बांध परियोजनाए

पाटनटेक बांध

जमुआ रामगढ बांध

👉 मुख्य झीले- मानसरोवर, जमुआ रामगढ, गलता पालनटेक व मावठा झील
👉 पर्यटन-

  1. विदेशी पर्यटको की दृष्टि से राज्य में प्रथम स्थान जयपुर का है।
  2. यहां पर 1955 में पर्यटन निदेशालय की स्थापना की गई।
  3. राजस्थान पर्यटन विकास निगम की स्थापना 1 अप्रेल 1979 को हुई।
  4. राजस्थान में पर्यटन पुलिस सर्वप्रथम 1 अगस्त 2000 में जन्तर मन्तर व आमेर मे तैनात की गई।
  5. पर्यटन क्षेत्र मे पाटा पुरूस्कार राज्य को 2010 में मिला जबकी इस पुरूस्कार की शुरूआत 1985 से हुई।

👉 प्रमुख महोत्सव-
  1. गणगौर महोत्सव - मार्च अप्रेल में
  2. तीज महोत्सव - जुलाई अगस्त में
  3. पतंग महोत्सव- जनवरी में
  4. हाथी महोत्सव- मार्च में

आर.टी.डी.सी. होटल – गणगौर, तीज, स्वागतम, युथ होस्टल व झील ग्राम

हैरिटेज होटल – शिव निवास पैलेस, राजमहल पैलेस, सामोद हवेली, नारायण निवास पैलेस व रामगढ लॉज

मुख्य वन्य जीव अभ्यारण्य - नाहरगढ अळयारण्य

मुख्य सभ्यताएं – नालियासर सभ्यता, जोधपुरा सभ्यता व बैराठ सभ्यता

छतरियां – इश्वरसिंह की छतरी व गैटोर की छतरी

हवेलियां – पुण्डरिक विट्ठल व पुरोहित हवेली

मुख्य मीनारे/मस्जिदे- इसरलाट, सलीम मंजिल, मुगल गेट , अशोक स्तभं व नालीसर मस्जिद

मुख्य मंदिर - जगतशिरोमणि मंदिर/मीरा मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर/बिड़ला मंदिर व गोविंद देव मंदिर

👉 कृषि विशेष-

कृषि मण्डीयां – टिंडा मण्डी, टमाटर मण्डी, आंवला मण्डी व मटर मण्डी

सर्वाधिक क्षेत्रफल वाली फसले- जौ व मटर

सर्वाधिक उत्पादन वाली फसले- बाजरा, जौ, मटर, टमाटर, कुल दलहन व लाल मिर्च

सड़के

राज्य के सबसे ज्यादा पंचायत मुख्यालय सड़को से जयपुर जिले के जुड़े है।

NH-8 पर देश का पहला प्लेन हाईवे है। यह प्रथम एक्सप्रेस हाईवे के रूप में विकसीत किया गया।

SH-1 (433 km) राज्य का सबसे बड़ा हाईवे है।

SH-23 (3 km) राज्य का सबसे छोटा हाईवे है।

NH-15 (875 km) राज्य मे सबसे लम्बा नैशनल हाईवे है।

NH-71B (5 km) राज्य मे सबसे छोटा नैशनल हाईवे है।

↝ NH-8 राज्य मे सबसे व्यस्ततम नैशनल हाईवे है।

NH-11 & NH-76 राज्य मे सर्वाधिक जिलो से गुजरने वाला नैशनल हाईवे है। जो सात सात जिलो से गुजरते है।

उद्योग

विश्वकर्मा क्षेत्र मे वनस्पति घी का कारखाना है जिसका वीर बालक ब्रांड प्रसिद्ध है। महाराजा वनस्पति घी व आमेर वनस्पति घी अच्छी साख वाले घी है।

सांभर झील से देश का 8.7 प्रतिशत नमक उत्पादित किया जाता है।

जयपुर मैटल्स बिजली के तार तैयार करता है।

कैप्सन मीटर कम्पनी पानी के मीटर तैयार करती है।

मान इण्डस्ट्रीयल कॉर्पोरेशन, जयपुर लौहे के टावर व इमारती खिड़कियां तैयार करती है। राजस्थान इलेक्ट्रीकल्स द्वारा टी.वी. सेट्स बनाए जाते है।

एशिया का सबसे बड़ा बियरिंग निर्माण कारखाना जयपुर में नैशनल इंजी. इण्डस्ट्रिज है

👉 खनिज - लौहा, मैग्नीज, बेरेलियम, काला संगमरमर, अभ्रक, रॉक फास्फेट, कैल्साइट, चीनी मृतिका व सिलिका रेत

ऊर्जा

जयपुर विद्युत वितरण निगम का मुख्यालय जयपुर मे है।

राज्य का प्रथम सौर उर्जा विद्युतीकृत गांव नया गांव जयपुर है।

राज्य का पहला सौर उर्जा ए.टी.एम. मनोहरपुरा मे

राज्य का पहला सौर उर्जा से संचालित रेलवे स्टेशन गौरमघाट है। जो अजमेर मण्डल से सम्बंध रखता है।

कचरे से विद्युत बनाने का पहला संयत्र जयपुर में बनाया गया है। जिसे कोटपुतली बायोमास प्लांट के नाम से जाना जाता है।

जयपुर जिला न्यूज़,जयपुर जिला दर्शन

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