Jalor (जालौर) District Jila darshan

जालौर
Jalor (जालौर) District Jila darshan
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प्राचीन नाम - सत्यपुर, नेहड़, महमूदाबाद, चौराई, भिल्लमाल, पीलोमीलो, भाद्राजून व भीनमाल।  
➥ जालौर प्राचीनकाल मे महर्षि जाबालि की तपोभूमि होने के कारण जाबालिपुर नाम से विख्यात था। 
 नवीन नाम - सांचौर 
 उपनाम - जलालाबाद, जाबालिपुर, जाहलुर, जालन्धर व मेदान्तक। 

परिचय

➥ यह सुकडी नदी के किनारे बसा है। 
➥ इसकी आकृति गोता लगाती व्हेल मछली की तरह है।
➥ नागभट्ट प्रथम ने 730 ई. मे भीनमाल को राजधानी बनाया व प्रतिहार वंश की स्थापना की। 
➥ संस्कृत महाकाव्य शिशुपालवधम के रचियता महाकवि माघ का संबन्ध भी भीनमाल से है। 
➥ खगोलशास्त्री ब्रहमगुप्त भी यही के है जिन्होने ब्रहमस्फुट का सिद्धान्त दिया।
 प्रसिद्ध चीनी यात्री हेनसांग ने (629-644) मे भीनमाल की यात्रा की तथा इस क्षेत्र को पीलोमीलो कहा उनकी प्रसिद्ध रचना सी.यू.की. है।
 जालोर का प्रसिद्ध नृत्य ढोल, झालर व सुकर है 

स्थान विशेष  

 सुवर्णगिऱी दुर्ग/कनकांचल - सुकडी नदी के किनारे स्थित किला जो प्रतिहार नरेश नागभट्ट प्रथम द्वारा बनवाया गया। यहा दुर्ग मे अलाउदीन की मस्जिद है।
 तोपखाना - जहां आजकल तोपखाना है वहां वस्तुत: परमार राजा भोज द्वारा संस्कृत पाठशाला बनवायी गई थी जिसे सरस्वती कण्ठाभरण पाठशाला के  नाम से जाना जाता है किसी कारणवश भोज इसका निर्माण पुरा नही करवा पाए व कालान्तर मे यहां तोपे रखी जाने लगी। 
 साका - यहां का प्रसिद्ध साका 1311-12 मे कान्हडदेव चौहान के काल मे हुआ जिसका सम्पूर्ण वर्णन पद्यनाभ की पुस्तक कान्हड़देव प्रबन्ध मे है। 
➥ सांथू - वीर फताजी का जन्मस्थल जहा मेला भी लगता है। 
 रानीवाड़ा - यहां राज्य की सबसे बडी दुग्ध की डेयरी है। 
 सांचौर  - इसे राजस्थान का पंजाब कहते है, यहां राज्य का प्रथम गोमूत्र बैं है, गोगाजी की ओंल्दी है व यंहा प्रसिद्ध रघुनाथपुरी का मेला लगता है। यह एक आखेट निषिद्ध क्षेत्र है! 
 नसौली  - यहां पीले रग कं ग्रेनाइट मिलते है। 
 नेहड़ - जालौर के अरब सागर के रेगिस्तानी दलदल का विस्तार जालोर कहलाता है 
 मोद्रा - सोनगरा चौहानो की कुलदेवी का आशापुरी मन्दिर।  
➥ पथमेड़ा - भारत की सबसे बडी गौशाला एंव कामधेनु विश्वविद्यालय। 
 सीलु - नर्बदेश्वर महादेव का मन्दिर व नर्मदा परियोजना जो राज्य की एकमात्र एसी परियोजना है जहा सिंचाई हेतु केवल फव्वारा पद्यती का प्रावधान है। 
 सुंधा माता - अरावली पर्बत श्रखंला के 1200  मीटर उंचाई पर सुधा पर्वत पर चामुमुण्डा माता का मन्दिर है। यहां वर्ष भर झरना बहता है। सुंधा अभिलेख भारतीय इतिहास का अनोखा दस्तावेज है। 
 सिरे मन्दिर- जालोर दुर्ग के समीप पहाडीयो मे स्थित सिरे मन्दिर नाथ सम्प्रदाय के प्रसिद्ध ऋषि जालन्धरनाथ की तपोस्थली है। मारवाड के शासक मानसिंह ने इसका निर्माण करवाया व बिपति काल मे यहां  शरण भी ली थी।
 महिला शिक्षा विहार- लोक जुम्बिश द्वारा चलाई जाने वाली इस सस्था द्वारा ग्रामीण महिलाओं को शिक्षा दी जाती है। 
 सेवडीया पशु मेला - रानीवाडा रेलवे स्टेशन से एक किलोमीटर दूर आयोजित इस मेले मे कांकरेज नस्ल के बैल व मुर्रा नस्ल की भैंसो का क्रय विक्रय अधिक होता है। 
बाँध -
• बीठन बांध 
 बांडी सेदडा बांध 
 चीतलवाणा बांध 
 चवरचा बांध 
मन्दिर-
➥ जहाज जैन मन्दिर  
➥ अपराजितेश्यर महादेव मन्दिर - रामसीन 
➥ सुन्धा माता - जसवंतपुरा, भीनमाल 
फसल विशेष-
• सर्वाधिक क्षेत्रफल वाली फसले -  अरण्डी व तम्बाकू 
 सर्वाधिक उत्पादन वाली फसले - अरण्डी , टमाटर, तम्बाकू , इसबगोल व जीरा
खनिजगुलाबी संगमरमर रिलायंस तेल समुह द्वारा भीनमाल मे तेल की खोज हेतु ब्लाक स्थापित किया गया है। 
उर्जा - कंचेला, बागसरी सांचोर मे बायोमास उर्जा संयत्र है। 
जिला विशेष
➤ उद्योतन सुरी ने अपने ग्रंथ कुवलयमाला की रचना जालोर मे ही की थी । 
➤ राजस्थान का प्रथम रोप-वे सुधा माता भीनमाल मे है । 
➤ यह सर्वाधिक ग्रेनाइट का उत्पादन करने वाला जिला है। 
➤ जालोर गुलाबी रंग के ग्रेनाइट के  लिए जाना जाता है । 
➤ पंचमुखी पहाड पर पांचोटा मे बाबा तल्लीनाथ का स्थल है । 
➤ जालोर मे से लूणी व व्यास नदी प्रवाहित होती है । 
➤ यहा पर इसबगोल मण्डी  है। 
➤ यहां  भीनमाल सभ्यता व भीनमाल बावडी है । 
➤ यह सर्वाधिक मादक पदार्थों व समग्र पदार्थों वाला जिला है ।

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